Assam CM’s Jibon Anuprerana Scheme (CMJAS) 2026: PhD स्कॉलर्स के लिए एक नई उम्मीद!

Assam CM’s Jibon Anuprerana Scheme (CMJAS) 2026: नमस्कार दोस्तों! हायर एजुकेशन और स्पेशलाइज़्ड रिसर्च करना कभी भी आसान सफर नहीं होता, खासकर जब बात PhD (डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी) जैसे इन-डेप्थ और डिमांडिंग कोर्स की हो। इंडिया में रिसर्च कल्चर को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारें अपनी तरफ से बहुत से यूनिक इनिशिएटिव लेती रहती हैं। अगर आप असम से हैं और अपनी PhD पूरी कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बहुत ही बढ़िया खुशखबरी है।

असम सरकार ने हाल ही में एक नई पहल शुरू की है जिसका नाम है “मुख्यमंत्री जीवन प्रेरणा स्कीम” (जिसे MyScheme पोर्टल पर CMJAS के नाम से जाना जाता है)[1][2]. आज के इस डिटेल्ड आर्टिकल में हम इसी असम CM की जीवन प्रेरणा स्कीम (CMJAS) के बारे में बात करेंगे। हम जानेंगे कि इसका मुख्य मकसद क्या है, इसमें कितनी फाइनेंशियल हेल्प मिलती है, डॉक्यूमेंट्स क्या चाहिए, और आप इसके लिए अप्लाई कैसे कर सकते हैं। चलिए, शुरू करते हैं!

PhD स्कॉलर्स के लिए फाइनेंशियल असिस्टेंस क्यों ज़रूरी है?

पीएचडी एक लंबा और मेहनत वाला सफर होता है जिसमें एक स्टूडेंट को कम से कम 3 से 5 साल तक एक खास टॉपिक पर डीप रिसर्च करनी पड़ती है। इस दौरान लैब टेस्टिंग, महंगी किताबें, इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल्स का सब्सक्रिप्शन, और फील्डवर्क में काफी बड़ा खर्चा आता है। बहुत से होनहार स्कॉलर्स, जो इकोनॉमिकली वीक बैकग्राउंड से आते हैं, उन्हें फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी रिसर्च की क्वालिटी से कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता है या फिर उन्हें बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने का ख्याल आने लगता है।

इन प्रॉब्लम्स को परमानेंटली सॉल्व करने के लिए सीएम की लाइफ़ प्रेरणा स्कीम एक उम्मीद की किरण बन कर आई है[1]। जब स्कॉलर्स के ऊपर से रोज़ का फ़ाइनेंशियल बोझ थोड़ा कम होता है, तब वो फ़्री माइंड से आउट-ऑफ़-द-बॉक्स सोच और स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट इनोवेशन की तरफ़ फ़ोकस कर पाते हैं।

CM’s Jibon Anuprerana Scheme (CMJAS) क्या है?

मुख्यमंत्री जीवन प्रेरणा स्कीम, स्किल, एम्प्लॉयमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप डिपार्टमेंट, गवर्नमेंट ऑफ़ असम द्वारा शुरू की गई एक फ़्लैगशिप फ़ाइनेंशियल असिस्टेंस योजना है। इस स्कीम का आखिरी मकसद असम स्टेट के पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स में पढ़ने वाले फ़ुल-टाइम रिसर्च स्कॉलर्स और दिव्यांग स्कॉलर्स को एक बार फ़ाइनेंशियल ग्रांट देना है। सरकार इस सपोर्ट के ज़रिए एकेडमिक एक्सीलेंस को प्रमोट करना चाहती है और असम को आगे चलकर देश का सबसे अच्छा R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) हब बनाना चाहती है।

कितना Financial Benefit (पैसा) मिलेगा?

अगर हम प्रैक्टिकल बेनिफिट्स की बात करें, तो असम सरकार इस स्कीम के तहत डायरेक्ट बेनिफिशियरी के बैंक अकाउंट में एकमुश्त अमाउंट ट्रांसफर करती है। सरकार ने इस स्कीम को दो सिंपल कैटेगरी में बांटा है:

नॉर्मल फुल-टाइम रिसर्च स्कॉलर्स: इन स्कॉलर्स को अपनी रिसर्च से जुड़ी ज़रूरतें पूरी करने के लिए ₹25,000/- का वन-टाइम फाइनेंशियल मदद मिलती है।

फुल-टाइम दिव्यांग रिसर्च स्कॉलर्स: उन स्कॉलर्स को जो फिजिकली चैलेंज्ड हैं और अपनी डिसेबिलिटीज़ के लिए रिसर्च में अपना शानदार योगदान दे रहे हैं, उनका सम्मान करने और एक्स्ट्रा सपोर्ट देने के लिए ₹40,000/- का वन-टाइम फाइनेंशियल बेनिफिट दिया जाता है।

यह रकम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए सीधे आपके अकाउंट में आती है जिसमें किसी भी बिचौलिए (बिचौलिए) का कोई रोल नहीं रहता।

Eligibility Criteria: क्या स्कीम के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?

हर सरकारी योजना की तरह CMJAS में भी अप्लाई करने के लिए कुछ खास एलिजिबिलिटी रूल्स हैं, जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है:

  1. असम का निवासी: एप्लीकेंट का असम का मूल निवासी होना ज़रूरी है।
  2. फुल-टाइम स्कॉलर: सिर्फ़ और सिर्फ़ फुल-टाइम PhD रिसर्च स्कॉलर या फुल-टाइम दिव्यांग स्कॉलर ही इसके एलिजिबल हैं।
  3. इंस्टीट्यूशन का टाइप: स्कॉलर का एडमिशन असम में किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या पब्लिक इंस्टीट्यूशन (स्टेट या सेंट्रल यूनिवर्सिटी) में होना चाहिए।
  4. एडमिशन ईयर: आपका एडमिशन PhD प्रोग्राम में सरकार द्वारा बताए गए एडमिशन ईयर (जैसे, साल 2025 के नोटिफिकेशन गाइडलाइंस के मुताबिक) में एनरोल होना चाहिए

Who are NOT Eligible? (कौन अप्लाई नहीं कर सकता?)

कौन इस स्कीम का फायदा उठा सकता है, यह जानने के साथ-साथ यह जानना भी ज़रूरी है कि कौन अप्लाई नहीं कर सकता:

प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स: अगर आप असम की किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से अपनी PhD कर रहे हैं, तो दुर्भाग्य से आप इस स्कीम में अप्लाई नहीं कर सकते हैं।

ओपन/डिस्टेंस यूनिवर्सिटी: डिस्टेंस एजुकेशन या ओपन यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले स्कॉलर्स को इसका फायदा नहीं मिलेगा।

पार्ट-टाइम स्कॉलर्स: यह स्कीम खास तौर पर उनके लिए है जो अपना 100% टाइम एकेडमिक रिसर्च को दे रहे हैं, इसलिए पार्ट-टाइम स्कॉलर्स इसमें कवर नहीं होते।

ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स (Important Documents Required)

ऑनलाइन एप्लीकेशन भरने से पहले आपके पास नीचे दिए गए डॉक्यूमेंट्स ठीक से स्कैन किए हुए फॉर्मेट में अवेलेबल होने चाहिए:

डोमिसाइल सर्टिफिकेट / PRC: जो प्रूफ करे कि आप असम के परमानेंट वासी हैं।

PHD एडमिशन प्रूफ: वैलिड आईडी, एनरोलमेंट सर्टिफिकेट, ऑफिशियल एडमिशन लेटर या एडमिशन की फीस रसीद।

वैलिड ID प्रूफ: जैसे आधार कार्ड, PAN कार्ड, या वोटर ID।

डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट: (अगर आप दिव्यांग कैटेगरी में ₹40,000 का बेनिफिट क्लेम कर रहे हैं)।

बैंक पासबुक कॉपी: जिसमें अकाउंट नंबर और IFSC कोड साफ दिख रहा हो (DBT ट्रांसफर के लिए अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है)।

सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म: अपने रिकॉर्ड्स और एक्सक्लूजन क्राइटेरिया से जुड़े बेसिक कंप्लायंस डॉक्यूमेंट।

Step-by-Step Application Process: ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें?

क्या स्कीम का एप्लीकेशन प्रोसेस काफी सिंपल और ज्यादातर ऑनलाइन है? नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करें:

स्टेप 1 – ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले आपको असम सरकार के ऑफिशियल डायरेक्टरेट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट एंड डेवलपमेंट ऑफ़ स्किल (DIDS) पोर्टल (dids.assam.gov.in) या फिर MyScheme पोर्टल पर जाना होगा। वह ‘CM’s Jibon Anuprerana Scheme’ सर्च करके अप्लाई लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 2 – फॉर्म भरें और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: अपनी बेसिक डिटेल्स जैसे नाम, इंस्टीट्यूशन का नाम, और एनरोलमेंट नंबर भरें। फिर बताए गए फ़ाइल साइज़ के अंदर अपने सभी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म सबमिट करने से पहले एक बार वेरिफाई ज़रूर करें और सबमिट बटन दबा दें।

स्टेप 3 – इंस्टीट्यूशनल वेरिफिकेशन (ऑफलाइन स्टेप): ऑनलाइन सबमिशन पूरा होने के बाद उस एप्लीकेशन फॉर्म का एक क्लियर प्रिंट-आउट ले लीजिए। इस प्रिंटआउट को अपने डिपार्टमेंट के हेड (HOD) या यूनिवर्सिटी के नोडल ऑफिसर के पास जमा करवा दें। आपकी यूनिवर्सिटी का डेजिग्नेटेड वेरिफायर (जैसे रजिस्ट्रार, प्रिंसिपल, या VC) इस फॉर्म को फिजिकली वेरिफाई करके आगे सेंट्रल अथॉरिटी को अप्रूवल के लिए फॉरवर्ड कर देगा।

फॉर्म भरते वक़्त इन ज़रूरी बातों का ध्यान रखें (प्रो टिप्स)

क्रॉस-वेरिफाई बैंक अकाउंट: अपना वही बैंक अकाउंट फॉर्म में डालें जो एक्टिवली चल रहा हो और आधार से मैप हो। DBT फेल होने की सबसे बड़ी वजह इनएक्टिव या ज़ीरो-बैलेंस ब्लॉक्ड बैंक अकाउंट होते हैं।

क्लियर स्कैन: अपलोड करते वक़्त ध्यान रखें कि सभी PDF/JPEG फाइलें हाई क्वालिटी और आसानी से पढ़ी जा सकें।

डेडलाइन फॉलो करें: यूनिवर्सिटी में ऑफलाइन फॉर्म जमा करने की एक खास इंटरनल डेडलाइन होती है, उस डेडलाइन से पहले अपना डिपार्टमेंटल वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरा करवा लें।

निष्कर्ष

दोस्तों, असम के सीएम की जीवन प्रेरणा स्कीम (CMJAS) सिर्फ एक मॉनेटरी फंड या सब्सिडी नहीं है, बाल्की यह असम सरकार का एक सीधा पॉजिटिव मैसेज है कि वो अपने स्टेट के रिसर्चर्स की मेहनत को वैल्यू देते हैं। एक देश और स्टेट की सच्ची तरक्की वहां किए गए रियल-टाइम इनोवेशन से होती है, और उन इनोवेशन के पीछे एक डेडिकेटेड PhD स्कॉलर का तेज दिमाग होता है।

अगर आप ऊपर बताई गई एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, तो आज ही DIDS या MyScheme पोर्टल पर लॉगिन करें और अपना ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें। ऐसी यूनिक और सपोर्टिव स्कीम से स्टूडेंट्स को ना सिर्फ एक टेम्पररी फाइनेंशियल रिलीफ मिलता है, बल्कि उनका आगे बढ़ने का कॉन्फिडेंस भी काफी बढ़ जाता है।

नोट: स्कीम से जुड़ी ऑफिशियल डेट्स, डेडलाइन एक्सटेंशन, या छोटे-मोटे रूल चेंज के लिए हमेशा ऑफिशियल “myScheme” पोर्टल या “DIDS असम” वेबसाइट चेक करते रहें।

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