CBSP-EP Scheme: टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी में अपना बिज़नेस शुरू करें!

CBSP-EP Scheme: नमस्कार दोस्तों! क्या आप अपने खुद का एक छोटा बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं? आज के टाइम में टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी एक ऐसी तेज़ी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री बन चुकी है, जहाँ सिर्फ़ जॉब्स ही नहीं, बल्कि बाल्की एंटरप्रेन्योरशिप (अपना व्यापार) के लिए भी हज़ारों नए मौके लग रहे हैं। लेकिन अपना काम शुरू करने के लिए सिर्फ़ पैसा नहीं, सही स्किल और एक सॉलिड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है।

अगर आपके पास कोई बड़ी डिग्री नहीं है, तो भी आप एक सफल बिज़नेसमैन बन सकते हैं। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने एक ऐसी बेहतर योजना शुरू की है जो आपको फ्री ट्रेनिंग, स्टाइपेंड और वैलिड सर्टिफिकेशन सब कुछ देती है। इस योजना का ऑफिशियल नाम है कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर सर्विस प्रोवाइडर्स – एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (CBSP-EP)। आज इस डिटेल्ड आर्टिकल में हम इस स्कीम के बारे में A से Z जानकारी लेंगे।

CBSP-EP स्कीम आखिर है क्या?

पर्यटन मंत्रालय ने एक अम्ब्रेला स्कीम चलाई है जिसका नाम है “कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर सर्विस प्रोवाइडर्स (CBSP)”। इसी के तहत एक स्वतः संज्ञान वाली सब-स्कीम निकाली गई है जिसे एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (EP) कहा जाता है। इस योजना का मुख्य मकसद टूरिज्म (पर्यटन) और हॉस्पिटैलिटी (अतिथि) सेक्टर में छोटे-छोटे बिजनेस और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट को ग्राउंड लेवल पर बढ़ावा देना है।

सरकार यह बात अच्छी तरह जानती है कि होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, ढाबा, बेकरी, या लोकल होमस्टे चलाने के लिए किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स चाहिए। इसलिए इस योजना के तहत सरकारी इंस्टिट्यूट में स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग उन युवाओं और नागरिकों के लिए एक वरदान है जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं और अपना खुद का व्यापार (जैसे फूड स्टॉल, बेकरी, या अतिथिगृह) स्थापित करना चाहते हैं।

कौन अप्लाई कर सकता है? (एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया)

सबसे अच्छी बात इस सरकारी स्कीम की है कि इसमें कोई बहुत बड़ी हाई-लेवल डिग्री की डिमांड नहीं की गई है। सरकार चाहती है कि इसका फायदा आम आदमी तक पहुंचे।

एज लिमिट: एप्लीकेंट की उम्र कम से कम 18 साल (साल) या उससे ज्यादा होनी चाहिए[1]। इसमें कोई स्ट्रिक्ट अपर एज लिमिट नहीं रखी गई है, इसका मतलब अगर आप मिडिल एज में भी अपना नया काम सीखना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल एलिजिबल हैं।

एजुकेशन क्वालिफिकेशन: मिनिमम एजुकेशन सिर्फ क्लास 8th पास (आठवी पास) मांगी गई है। यह उन सभी युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका है जो आर्थिक परेशानियों या किसी और वजह से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।

ट्रेनिंग कोर्स की जानकारी और टॉप 5 ट्रेड

इस प्रोग्राम के तहत उम्मीदवारों को कुल 150 घंटे का इंटेंसिव, प्रैक्टिकल-बेस्ड कोर्स करवाया जाता है। यह ट्रेनिंग 5 खास ट्रेड में उपलब्ध है, जिनकी मार्केट में आजकल सबसे ज़्यादा डिमांड है:

  • कुक: तंदूर (तंदूर शेफ): तंदूरी रोटी, टिक्का और कबाब की डिमांड इंडिया के हर रेस्टोरेंट और ढाबे में होती है। इस कोर्स के बाद आप अपना क्लाउड किचन, तंदूरी कॉर्नर, या फूड स्टॉल आराम से शुरू कर सकते हैं। बारमैन (बारटेंडर/पेय विशेषज्ञ): मॉकटेल, शेक और ड्रिंक बनाना एक आकर्षक कला है। कैफे और होटल में एक कुशल बारमैन की वैल्यू बहुत ज्यादा होती है।
  • बेकर: आज कल हर छोटी खुशी या पार्टी पर केक कट होता है। बेकरी, कुकीज़, और पेस्ट्री का व्यवसाय कम निवेश से शुरू करके अधिक लाभ दे सकता है।
  • होमस्टे (बहु-कुशल केयरटेकर): पहाड़ी इलाकों और पर्यटन स्थलों पर लोग अब पारंपरिक होटलों के बजाए सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होमस्टे में रुकना पसंद करते हैं। इस व्यापार में मेहमानों को संभालना, उनकी देखभाल और बुनियादी रिसॉर्ट प्रबंधन सिखाया जाता है।
  • हलवाई (भारतीय मिठाइयाँ): भारत त्योहारों का देश है। एक प्रशिक्षित हलवाई अपना स्वीट हाउस खोलकर हमेशा अच्छा मुनाफ़ा कमा सकता है क्योंकि मिठाइयों की मांग सदाबहार रहती है।

सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता और फायदे

जब हम किसी बिजनेस ट्रेनिंग की बात करते हैं तो लगता है कि इंस्टीट्यूट की फीस भी काफी महंगी होगी. लेकिन दोस्तों, यह पूरी ट्रेनिंग कैंडिडेट के लिए बिल्कुल फ्री होती है:

  • सरकार एक ट्रेनी पर ₹11,340/- का कुल खर्च वहन करती है. इस सरकारी खर्चे में नीचे दी गई सभी सुविधाएं शामिल होती हैं:
  • ट्रेनिंग फीस (आपको एक रुपया भी फीस नहीं देनी है)।
  • कोर्स मटीरियल (पढ़ने के लिए ज़रूरी नोट्स और किताबें)।
  • सर्टिफिकेशन (कोर्स पूरा होने पर मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म का वैलिड सर्टिफिकेट)।
  • एप्रन और यूनिफॉर्म (प्रैक्टिकल क्लास सुरक्षित रूप से कंडक्ट करने के लिए)।
  • लंच (क्लास के दौरान दोपहर का मुफ्त खाना)।
  • स्टाइपेंड (ट्रेनिंग पूरी करने पर पॉकेट मनी या बेसिक फाइनेंशियल हेल्प)।
  • इसके अलावा, इंस्टीट्यूशन्स को कैंडिडेट्स के बोर्डिंग/लॉजिंग (रहने की सुविधा) और एडवर्टाइजमेंट का खर्च भी अलग से रीइंबर्स किए जाते हैं।

ट्रेनिंग कहाँ होगी? (ऑथराइज़्ड इंस्टिट्यूट)

यह स्कीम किसी भी रैंडम प्राइवेट इंस्टिट्यूट में नहीं है, बल्कि जाने-माने सरकारी बॉडीज़ में चलाई जाती है ताकि आपको बेस्ट इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स सिखाएं। ट्रेनिंग ज़्यादातर जगहों पर है:

  1. सभी सरकारी स्पॉन्सर्ड टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी इंस्टिट्यूट (जैसे IHM – इंस्टिट्यूट ऑफ़ होटल मैनेजमेंट की ब्रांच)।
  2. केरल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टूरिज्म एंड ट्रैवल स्टडीज़ (KITTS)।
  3. इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (ITDC) की अलग-अलग ब्रांच।

अप्लाई कैसे करें और इसका फ्यूचर क्या है?

इस योजना के बारे में पूरी ऑनलाइन डिटेल आप सीधे myScheme.gov.in पोर्टल पर जाकर चेक कर सकते हैं। वहाँ पर स्कीम्स सेक्शन में ‘कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर सर्विस प्रोवाइडर्स – एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’ (CBSP-EP) सर्च करें। वहाँ से आप अपने सबसे पास के IHM या ITDC सेंटर का पता लगाकर सीधे ऑफलाइन या ऑनलाइन कॉन्टैक्ट कर सकते हैं।

अपना बिज़नेस शुरू करना कोई आसान काम नहीं है, पर जब आपके पास सही स्किल और एक मान्यता प्राप्त सरकारी सर्टिफिकेट होता है, तो आपको मुद्रा लोन (PMMY) जैसी सरकारी स्कीम से बैंक लोन मिलना भी बहुत आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

तो देर किस बात की? अगर आपने कम से कम 8th क्लास तक पढ़ाई की है[1], 18 साल की उम्र सीमा पार कर चुके हैं[1], और खाना, हॉस्पिटैलिटी या टूरिज्म में अपना पैशन रखते हैं, तो यह CBSP-EP स्कीम आपका पूरा फ्यूचर बदल सकती है। आज ही इस सरकारी ट्रेनिंग में हिस्सा लेने के लिए आगे बढ़ें, नई स्किल्स सीखें, और जॉब ढूंढने वाले की जगह खुद का बिज़नेस चलाकर दूसरों को जॉब देने वाले बनें!

Guidelines – ENTREPRENEURSHIP PROGRAMME (EP)

Guidelines – Capacity Building For Service Provider (CBSP)

Application Form (IHM, Gandhinagar)

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