COP-37 Scheme Se Payein ₹20 Lakh Tak Ki Capital Subsidy: गुजरात के कोऑपरेटिव यूनियनों के लिए बड़ी पहल!

COP-37 Scheme: गुजरात सरकार हमेशा से अपने किसान भाइयों और एग्रीकल्चर सेक्टर को मजबूत करने के लिए नई-नई स्कीम लाती रहती है। किसानों की तरक्की में कोऑपरेटिव सोसाइटी और यूनियन का बहुत बड़ा रोल होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर, फार्मर्स वेलफेयर एंड को-ऑपरेशन, गुजरात सरकार ने एक बेहतर योजना शुरू की है, जिसका नाम है “COP-37 (जनरल एरिया) 50% कैपिटल सब्सिडी स्कीम फॉर प्रोजेक्ट ऑफ़ तालुका एंड डिस्ट्रिक्ट को-ऑप. परचेज़ सेल यूनियन”.

इस स्कीम का मकसद तालुका और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर काम करने वाले कोऑपरेटिव परचेज़ और सेल यूनियन को फाइनेंशियली मज़बूत बनाना है। अगर एक कोऑपरेटिव यूनियन आर्थिक रूप से मज़बूत होगा, तो उन किसानों को बेहतर एग्रीकल्चरल इनपुट और सर्विसेज़ दे पाएगा। आइए इस डिटेल आर्टिकल में समझते हैं कि यह COP-37 स्कीम क्या है, इसके बेनिफिट्स क्या हैं, कौन अप्लाई कर सकता है और इसका पूरा ऑफलाइन एप्लीकेशन प्रोसेस कैसा होता है।

स्कीम का मकसद (Objective) क्या है?

गुजरात में बहुत सारे तालुका और डिस्ट्रिक्ट लेवल के ‘परचेज़ एंड सेल यूनियन’ हैं, जो किसानों की फसल खरीदने और उन्हें बीज, फर्टिलाइज़र जैसी चीज़ें देने का काम करते हैं। लेकिन कई बार फंड की कमी की वजह से ये यूनियन मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप नहीं कर पाते।

इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए सरकार इन यूनियनों को नए एग्रीकल्चरल प्रोजेक्ट लगाने, मॉडर्न प्रोसेसिंग यूनिट बनाने, और गोदाम तैयार करने के लिए 50% कैपिटल सब्सिडी दे रही है। इसका लॉन्ग-टर्म विज़न यह है कि जब यूनियनों के पास ग्रेडिंग, क्लीनिंग, पैकेजिंग और स्टोरेज की अच्छी सुविधा होगी, तो मार्केट में फसल की क्वालिटी बेहतर होगी और किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलेगा।

स्कीम के मुख्य फायदे (Key Benefits)

इस स्कीम के तहत कोऑपरेटिव यूनियनों को क्या डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फायदे मिलते हैं:

  1. 50% कैपिटल असिस्टेंस: सरकार एलिजिबल प्रोजेक्ट की टोटल कॉस्ट का 50% हिस्सा सब्सिडी के तौर पर देगी। क्या फाइनेंशियल हेल्प की मैक्सिमम लिमिट (कैप) ₹20,00,000 (बीस लाख रुपये) तय की गई है। अगर प्रोजेक्ट बड़ा है तब भी मैक्सिमम सब्सिडी 20 लाख ही मिलेगी। 2. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: ये फंड सिर्फ रॉ मटेरियल खरीदने के लिए नहीं हैं, लेकिन सॉलिड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि स्टोरेज गोडाउन, प्रोसेसिंग यूनिट, सॉर्टिंग, वॉशिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सुविधाएं सेट अप करने के लिए दिए जाते हैं।
  2. किसानों को बेहतर सर्विस: जब कोऑपरेटिव यूनियन एडवांस हो जाएगा, तो उन किसानों से उनकी फसल MSP (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) पर आसानी से खरीद पाएगा। साथ ही किसानों को उनकी खेती के लिए हाई-क्वालिटी के इनपुट (खाद और बीज) आसानी से मिलेंगे।
  3. मार्केट एक्सेस बढ़ाना: ब्रांडिंग और मॉडर्न पैकेजिंग की मदद से गुजरात के एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स का मार्केट बेस बड़ा होगा और सप्लाई चेन में काफी सुधार आएगा।

कौन अप्लाई कर सकता है? (Eligibility Criteria)

क्या कैपिटल सब्सिडी को क्लेम करने के लिए सरकार ने कुछ बेसिक और ज़रूरी शर्तें रखी हैं:

  • यूनियन का टाइप: यह स्कीम सिर्फ़ गुजरात राज्य के तालुका और डिस्ट्रिक्ट लेवल के कोऑपरेटिव परचेज़ एंड सेल एसोसिएशन / यूनियन के लिए है। अलग-अलग किसान इसके लिए सीधे अप्लाई नहीं कर सकते।
  • लैंड ओनरशिप की ज़रूरत: सबसे ज़रूरी शर्त यह है कि जिस ज़मीन पर प्रोजेक्ट (गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट, वगैरह) बनने वाला है, उस ज़मीन की ओनरशिप पूरी तरह से कोऑपरेटिव यूनियन के नाम पर ही होनी चाहिए। अगर ज़मीन किराए पर या लीज़ पर है, तो यूनियन एलिजिबल नहीं होगी।

अप्लाई करने के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स (Required Documents)

एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू करने से पहले, यूनियन के ऑथराइज़्ड रिप्रेज़ेंटेटिव्स को एक सॉलिड फ़ाइल तैयार करनी होगी। इसमें ये सब डॉक्यूमेंट्स लगाना ज़रूरी है:

  • एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट प्रपोज़ल डॉक्यूमेंट (जिसमें प्रोजेक्ट का पूरा ब्लूप्रिंट और कॉस्ट एस्टीमेट हो)।
  • ज़मीन के कागज़ (लैंड ओनरशिप प्रूफ)।
  • कोऑपरेटिव यूनियन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट।
  • यूनियन के ऑफिस बेयरर्स का आइडेंटिटी प्रूफ।
  • यूनियन के बैंक अकाउंट की पूरी डिटेल्स।
  • डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार से मिला हुआ एक अप्रूवल लेटर (जो प्रपोज़ल को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है)।
  • यूटिलाइज़ेशन सर्टिफिकेट और प्रोग्रेस रिपोर्ट (ये पैसा रिलीज़ होने के टाइम फेज़ में देना होता है)।

एप्लीकेशन कैसे सबमिट करें? (Step-by-Step Process)

इस स्कीम के लिए अभी ऑफलाइन एप्लीकेशन प्रोसेस रखा गया है, जो कि इस तरह है:

  • स्टेप 1: तालुका या डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव यूनियन को अपने प्रपोज़्ड एग्रीकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का एक डिटेल्ड और वेरिफाइड प्रपोज़ल तैयार करना होगा।
  • स्टेप 2: इस प्रपोज़ल को उन्हें अपने एरिया के डिप्टी डायरेक्टर और डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के ऑफिस में फिजिकली जमा करना होगा।
  • स्टेप 3: डिस्ट्रिक्ट लेवल पर वेरिफिकेशन के बाद, यह फाइल आगे गांधीनगर में रजिस्ट्रार ऑफ़ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़, गुजरात स्टेट को भेजी जाती है। वहां से इस फाइल को डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर को फाइनल अप्रूवल के लिए फॉरवर्ड किया जा सकता है।
  • स्टेप 4: अप्रूवल मिलने के बाद, ₹20 लाख तक की जो सब्सिडी है वो यूनियन को एक साथ (एकमुश्त) नहीं मिलती। प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन या काम पूरा होने के हिसाब से पैसे इंस्टॉलमेंट (फेज़) में रिलीज़ किए जाते हैं, ताकि फंड का सही इस्तेमाल हो सके।

निष्कर्ष

“COP-37 50% कैपिटल सब्सिडी स्कीम” सच में गुजरात के एग्रीकल्चर और कोऑपरेटिव सेक्टर को अपग्रेड करने के लिए एक गेम-चेंजिंग कदम है। कोऑपरेटिव यूनियन इस स्कीम के ज़रिए अपने पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बना सकते हैं, जिससे सीधा फायदा गाँव-गाँव में बैठे किसानों को होगा। अगर आप किसी तालुका या जिला सहकारी क्रय-विक्रय संघ के सदस्य या पदाधिकारी हैं, तो इस योजना का लाभ उठाने के लिए आज ही अपने जिला रजिस्ट्रार से संपर्क करें और एक अच्छा सा प्रोजेक्ट प्रस्ताव तैयार करें!

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